श्रीमती अब नहीं, आखिरकार सीईओ

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अध्याय 89

वह उसके पीछे-पीछे उजाले से भरे ड्रॉइंग रूम में चली गई।

जानी-पहचानी अनुभूतियाँ उस पर टूट पड़ीं—ऊपर लटकता क्रिस्टल का झूमर, महँगा फ़ारसी कालीन, और हर वह पुरानी नायाब चीज़ जिसे उसने कभी बड़े जतन से सजाकर रखा था…

यही तो वह “घर” था, जिसे बनाने में उसने अपना दिल उँडेल दिया था।

नज़रअंदाज़ किए जाने के वे...

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